– Sourabh Arora

Home » जब अंग्रेजों पर हावी हो गए थे संदीप पाटिल

संदीप पाटिल – एक ऐसा नाम जिन्हें भारतीय क्रिकेट में खूब पहचान मिली और इस पहचान के पीछे की बड़ी वजह आज के दिन के इतिहास जुड़ी घटना है। जहां इस दिन वर्ष 1983 में विश्व कप के सेमीफाइनल में संदीप पाटिल ने इंग्लैंड के खिलाफ यादगार पारी खेली थी। उनकी यह पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ उन्हीं की सरजमीं पर यह कमाल किया था और भारतीय टीम को पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी।

मैनचेस्टर के मैदान पर खेले गए सेमीफाइनल में मेजबान इंग्लैंड ने भारतीय टीम को निर्धारित 60 ओवरों में 214 रनों का लक्ष्य दिया था जिसका पीछा करते हुए भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही जहां उसने महज 50 रनों के स्कोर पर अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों-सुनील गावसकर और श्रीकांत के विकेट गंवा दिए थे जिसके बाद पहले मोहिंदर अमरनाथ और यशपाल शर्मा ने मिलकर भारतीय पारी को संभाला और 92 रन जोड़े लेकिन एक बार फिर भारतीय टीम और फैंस की मुसीबत तब बढ़ी, जब मोहिंदर अमरनाथ के रूप में भारत को 142 रनों पर तीसरा झटका लगा था।

मैदान पर एक बार फिर मेजबान टीम के पास मौका था मैच में वापसी करने का लेकिन ऐसा मुमकिन हो नहीं पाया क्योंकि मोहिंदर अमरनाथ के बाद बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे संदीप पाटिल जो शायद ड्रेसिंग रूम से ही अटैकिंग बल्लेबाजी के इरादे से मैदान पर उतरे थे और उन्होंने मैदान पर आते ही चौकों की बारिश शुरू कर दी और महज 32 गेंदों में 8 चौकों की मदद से नाबाद 51 रन जड़ दिए। हालांकि इस दौरान उन्हें दूसरे छोर से यशपाल शर्मा का भी बखूबी साथ मिला लेकिन यशपाल 61 के स्कोर पर आउट हो गए थे लेकिन तक तक इस मैच में भारतीय टीम बहुत आगे निकल चुकी थी और संदीप पाटिल की यह तेजतर्रा पारी ही वजह बनी कि भारत ने 214 रनों का लक्ष्य महज 54.4 ओवरों में हासिल कर लिया। हालांकि इस मैच में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड संदीप पाटिल को नहीं बल्कि मोहिंदर अमरनाथ को मिला था क्योंकि उन्होंने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन के चलते 2 विकेट और 46 रनों की अहम पारी खेली थी।

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