अपना टाइम आ गया… भारत सबसे आगे आ गया

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~सुहानी गुप्ता

केपटाउन में दूसरे क्रिकेट टेस्ट में साउथ अफ्रीका पर शानदार जीत के बाद
टीम इंडिया वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2023-25 की पॉइंट्स टेबल में पहले
स्थान पर पहुंच गई। साउथ अफ्रीका में अपना पहला टेस्ट मैच जीतने की भारत
की उम्मीदें सेंचुरियन में एक पल में टूट गईं क्योंकि साउथ अफ्रीका ने
उसे दो मैचों की सीरीज़ के पहले मैच में पारी और 32 रन से हरा दिया था।
इस हार के साथ भारतीय टीम छठे स्थान पर लुढ़क गई लेकिन केपटाउन में जीत
के साथ टीम इंडिया ने एक बार फिर लम्बी छलांग लगाई और वह छठे से पहले
स्थान पर पहुंच गई। यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि टीम इंडिया ने दो
दिनों में जीत हासिल कर ली।

यह टेस्ट क्रिकेट में एक अनोखा नज़ारा था क्योंकि केपटाउन टेस्ट में पहले
दिन दो पारियां पूरी हो गईं और दूसरे दिन के दूसरे सेशन में ही खेल
समाप्त हो गया और भारत साउथ अफ्रीका पर सात विकेट से विजयी हुआ।
सेंचुरियन में प्रोटियाज़ टीम के खिलाफ शर्मनाक हार के बाद भारत की
मौजूदा डब्ल्यूटीसी में शानदार प्रदर्शन करने की उम्मीदें जग गई हैं।

जहां इस जीत के साथ टीम इंडिया पहले स्थान पर है तो वहीं साउथ अफ्रीका
दूसरे स्थान पर आ गया हैं। गुरुवार को भारत से हार का मतलब यह है कि अब
साउथ अफ्रीका की जीत का प्रतिशत न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश
के समान 50 प्रतिशत तक गिर गया है। दो जीत, एक हार और एक ड्रॉ के बाद 26
अंकों के साथ भारत का जीत 54.16 प्रतिशत है।

न्यूलैंड्स में अपनी पहली जीत के बाद 12 अंक हासिल करके भारत ने
डब्ल्यूटीसी के टेबल में अपनी जगह सबसे ऊपर बना ली है। इससे पहले भारत
साउथ अफ्रीका में जोहानिसबर्ग, डरबन और सेंचुरियन में ही जीत हासिल कर
सका था। इस बार केपटाउन की विजय पताका भी इसमें जुड़ गई है। दो दिनों में
पूरा होने वाला यह अब तक का 25वां टेस्ट मैच था और पिछले साल गाबा में
साउथ अफ्रीका पर ऑस्ट्रेलिया की जीत के बाद पहला। यह न्यूलैंड्स में भारत
की पहली जीत भी थी और सीरीज़ 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुई।

सेंचुरियन की जीत के बाद साउथ अफ्रीका ने साबित कर दिया कि बाहर से आने
वाली टीमों के खिलाफ उनका गौरवपूर्ण घरेलू रिकॉर्ड रहा है। इससे पहले
साउथ अफ्रीका ने सेंचुरियन में पहली पारी में 163 रन की बढ़त के साथ 408
रन बनाये थे। भारत ने न्यूजीलैंड में जो पिछले 20 टेस्ट खेले हैं, उनमें
से उसने 2009 में हैमिल्टन में एकमात्र मैच जीता, जो भारत ने 41 साल में
पहली बार महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में सीरीज़ जीती। केपटाउन भी एक
ऐसी जगह थी जहां भारतीय टीम पहले कभी नहीं जीती थी। यहां तक कि इस मैदान
पर जीत दर्ज करने वाली वह पहली एशियाई टीम बन गई।

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