किसमें कितना है दम / ऑस्ट्रेलिया

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ऑस्ट्रेलिया ने ऑलराउंडरों पर दिखाया है भरोसा, खल सकती है स्पिनरों की कमी

वर्ल्ड कप के दावेदारों में अगर किसी टीम का प्रमुखता से हर बार ज़िक्र किया जाता है तो वह टीम ऑस्ट्रेलिया है, जो पांच बार की वर्ल्ड चैम्पियन है और जिसने हाल में पिछली चैम्पियन इंग्लैंड का क्लीन स्वीप किया है और श्रीलंका को 2-1 से हराया है। भारत से अगर यह टीम हालिया सीरीज़ हारी है तो वह इसलिए कि उस सीरीज़ में ज़्यादातर मौकों पर न तो ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख खिलाड़ी खेले और न ही टीम इंडिया के। इससे एक ही बात ज़ाहिर हुई कि टीम इंडिया की बेंच स्ट्रेंथ ऑस्ट्रेलिया से बेहतर है लेकिन इससे पिछली सीरीज़ में इस टीम ने टीम इंडिया को भी हराया है।

ऑस्ट्रेलिया ने बल्लेबाज़ी को मज़बूत करने पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया है। टीम में आखिर तक बल्लेबाज़ी है। मिचेल स्टार्क तो बड़े हिट लगाते ही हैं बल्कि हैज़लवुड ने भी भारत के खिलाफ इंदौर में निचले क्रम में एक अहम भागीदारी की थी। पैट कमिंस की हिटिंग क्षमता से हर कोई वाकिफ है। दूसरे, टीम के पास वॉर्नर, ट्रेविस हैड और एलेक्स कैरी के रूप में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं। इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज़ में अगर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने हाल में हराया है तो सिर्फ इसलिए कि हैड और वॉर्नर की ओपनिंग जोड़ी और स्मिथ का नम्बर तीन पर खूब रन बनाना उसकी बड़ी वजह है। मिचेल मार्श को भारत की पिचें काफी रास आती हैं। कभी राजकोट तो कभी विशाखापत्तनम तो कभी मुम्बई, इन तीनों वैन्यू पर उन्होंने हाल में खूब रन बनाए हैं। अगर उन्हें नम्बर तीन पर, स्मिथ को नम्बर चार पर और लैबुशेन को नम्बर पांच पर उतारा जाता है तो यह दुनिया के टॉप बैटिंग ऑर्डर में से एक होगा। फिर नम्बर छह पर बाएं हाथ के एलेक्स कैरी और सात नम्बर पर ग्लेन मैक्सवेल और फिर चार गेंदबाज़ों का आना, जिसमें पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोश हैज़लवुड और एडम ज़ैम्पा शामिल हैं।

ट्रेविस हैड क्योंकि शुरुआती मैच खेलते नहीं दिख रहे तो सम्भव है कि उनकी जगह कैमरून ग्रीन और मरकस स्टायनिस में से किसी एक को खिलाया जाएगा। यानी टीम के पास ऑलराउंडरों की कोई कमी नहीं है। इन दोनों के अलावा मिचेल मार्श भी ज़रूरत पड़ने पर टीम को ब्रेकथ्रू दिलाने के लिए जाने जाते हैं। शॉन एबट ने भी इंदौर में भारतीय गेंदबाज़ों पर ताबड़तोड़ शॉट खेले थे।

टीम में एडम ज़ैम्पा के रूप में एकमात्र नियमित स्पिनर का होना भी कई सवाल खड़े करता है। इसकी भरपाई टीम ग्लेन मैक्सवेल, मार्नस लैबुशेन और स्टीव स्मिथ की स्पिन गेंदबाज़ी से करेगी। इनमें मैक्सवेल ने राजकोट वनडे में रोहित, विराट, श्रेयस और सुंदर को आउट करके पविलियन भेजा था। उनके सामने कदमों का इस्तेमाल करते हुए सामने खेलने से बचना ही बेहतर विकल्प होगा। बाकी एडम ज़ैम्पा ने हाल में विराट के अलावा केएल राहुल और शुभमन गिल को भी काफी परेशान किया है। गिल को उन्होंने इस बार मोहाली में और पिछली बार चेन्नै में आउट किया है। उनकी खासकर स्किड होती गेंदों से गिल खासे परेशान हुए।

ज़ैम्पा और स्टार्क टीम के गेंदबाज़ी आक्रमण की ताक़त हैं। कमिंस और हैज़लवुड पहले जैसा असरदार नहीं रह गए हैं। एबट और ग्रीन की धुनाई भारतीय बल्लेबाज़ हालिया सीरीज़ में खूब कर चुके हैं। ऐसे में यही कहना ठीक होगा कि यह टीम बल्लेबाज़ी और अपने पेशेवरपन के दम पर ही खिताब जीतने का सपना संजोए भारत आई है। क्या इतना ही काफी होगा।

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