पृथ्वी शॉ को नार्देम्पनशर में मिलेगा डेविड विली और एंड्रयू टाई का साथ

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भारत में आम तौर पर जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी लय से दूर
होते हैं, उनके लिए इंग्लिश काउंटी क्रिकेट लय में आने का ज़रिया साबित
होता है। हाल में चेतेश्वर पुजारा ससेक्स से, आजिंक्य रहाणे लीस्टरशर से,
अर्शदीप सिंह केंट से और नवदीप सैनी वूस्टरशर से काउंटी क्रिकेट में उतरे
और उन्होंने अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। अब बारी पृथ्वी शॉ की है जो
इंग्लिश काउंटी खेलने के लिए इंग्लैंड पहुंच चुके हैं।

पृथ्वी शॉ नार्देम्पटनशर के लिए खेलेंगे। उस टीम से जहां से कभी अनिल
कुम्बले खेल चुके हैं। इस टीम में जॉन सैडलर जैसे काबिल कोच का उन्हें
सानिध्य मिलेगा। इसके अलावा इस टीम में डेविड विली और एंड्रयू टाई जैसे
धाकड़ तेज़ गेंदबाज़ हैं, जिनकी गेंदबाज़ी का उन्हें खासकर नेट्स पर
सामना करने का मौका मिलेगा। यह अच्छा ही है कि वह पहले वनडे में खेलेंगे,
जहां स्विंग होती गेंदों पर पूर्वानुमान लगाने में उन्हें मदद मिलेगी। यह
पूरा टूर्नामेंट उन्हें व्हाइट बॉल क्रिकेट से ही खेलना है। इसके बाद
उन्हें रेड बॉल क्रिकेट में खेलना है। इसी फॉर्मेट में वह अपनी खोई हुई
फॉर्म को तलाशने के लिए यहां आए हैं।

पृथ्वी शॉ ने काउंटी क्रिकेट में उतरने के लिए पुडुचेरी में चल रही देवधर
ट्रॉफी से हटने के लिए बोर्ड से आवेदन किया था, जिसकी बोर्ड से उन्हें
अनुमति मिल गई। पृथ्वी ने पिछले साल असम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में 379 रन
की पारी खेली। इस तरह उन्होंने संजय मांजरेकर के 377 के स्कोर को भी पार
कर लिया। पृथ्वी जब चलते हैं तो खूब चलते हैं। उनका बल्ला खूब रन बरसाता
है लेकिन जब बल्ला शांत होता है तो उन्हें लय में आने में काफी वक्त लग
जाता है। उनके छोटे से टेस्ट करियर को देखें तो वह अब तक चार टेस्ट खेले
हैं। जो पहले दो टेस्ट उन्होंने भारत में खेले, वहां उन्होंने एक सेंचुरी
और एक हाफ सेंचुरी बनाई लेकिन न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में उनका बल्ला
नहीं चला। वहीं यह भी मानना होगा कि उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिले।

पृथ्वी की खेलने की शैली ही आक्रामक है। वह वनडे फॉर्मेट में प्रभावी
साबित हो सकते हैं। उन्होंने अब तक छह वनडे खेले हैं लेकिन इनमें उनकी एक
भी हाफ सेंचुरी नहीं है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीन और श्रीलंका के खिलाफ
तीन मैच उन्होंने खेले लेकिन ये सभी मैच विदेशी ज़मीं पर खेले गए। पृथ्वी
सचिन के बाद टेस्ट सेंचुरी लगाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर हैं। अपने पहले
रणजी, दिलीप ट्रॉफी और टेस्ट में सेंचुरी लगाने के साथ ही उन्होंने एक
बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। इनमें सचिन पहले दो मौकों पर पहले मुक़ाबले
में सेंचुरी लगाने में सफल रहे। इन्हीं की कप्तानी में भारत ने अंडर 19
का वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से हराकर जीता था। अब अगर भारतीय
टीम में वापसी को लेकर इंग्लिश काउंटी अहम भूमिका निभाती है तो यह उनके
करियर में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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