बीसीसीआई की पहल पर हुआ दूध का दूध, पानी का पानी

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आशीष मिश्रा

टीम इंडिया में लगातार उथल पुथल चल रही हैं। कभी खिलाड़ियों में मनमुटाव की खबरें आती हैं तो कभी टीम के दो गुटों में बंटने की। टी-20 फॉर्मेट में हार्दिक पांड्या टीम की कप्तानी संभाल रहे थे और रोहित शर्मा वनडे और टेस्ट टीम के कप्तान थे लेकिन हार्दिक के लंबे समय से टीम के बाहर होने के कारण रोहित शर्मा को टी20 का भी कप्तान बना दिया गया। उसके बाद से ही खबरें आ रहीं थी कि कुछ खिलाड़ी रोहित को टीम के कप्तान बनाए जाने से खुश नहीं हैं। अगर सारी चीजों पर गौर करें तो इस वक्त टीम दो गुटों में बटी नजर आती है, वह खिलाड़ी जो हार्दिक की कप्तानी के पक्ष में हैं और एक हिस्सा वह जो रोहित की कप्तानी के पक्ष में है। ऐसे में हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के मन में यही सवाल चल रहा था कि टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का कप्तान कौन होगा?

बुधवार को जब बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने रोहित शर्मा को टी-20 वर्ल्ड कप में कप्तान और हार्दिक के उप कप्तान होने का ऐलान किया तो रोहित शर्मा के फैंस के दिलों में खुशी की लहर दौड़ गई। रोहित लंबे समय से टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं और उनकी कप्तानी में टीम का प्रदर्शन भी कमाल का रहा है लेकिन मुंबई इंडियंस के उनको कप्तानी से हटाए जाने के बाद ऐसा लग रहा था कि उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी से भी हटा दिया जाएगा क्योंकि रोहित अभी तक कोई भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाए हैं।

इस असमंजस की स्थिति के पीछे बड़ी वजह है हार्दिक पांड्या का टीम से अंदर-बाहर होना। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 11 टी-20 मैच खेले हैं जिनमें से आठ मैच जीते हैं और दो मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा है जबकि एक मैच ड्रा रहा है। उनकी कप्तानी में टीम ने 77 फीसदी मुकाबले जीते हैं। वह कमाल के खिलाड़ी भी हैं और कमाल के कप्तान भी लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या रही है उनका बार-बार अनफिट होना। उनके अनफिट हो जाने के कारण उन्हें कई बार टीम से बाहर होना पड़ता है जिसकी वजह से टीम को फिर नए कप्तान की तलाश करनी पड़ती है। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट सितंबर 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था और अपना आखिरी वनडे 2016 में धर्मशाला में खेला था। इसी तरह टी-20 मैच में उन्हें खेले पांच महीने हो चुके हैं। शायद उनके लंबे समय से टीम से बाहर होने की वजह से उन्हें टी-20 में कप्तानी से हाथ धोना पड़ा है।

आज के तेज क्रिकेट के युग में खिलाड़ियों का झुकाव फ्रेंचाइजी लीग खेलने और टी-20 क्रिकेट की तरफ ज्यादा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हार्दिक पांड्या बनते जा रहे हैं। उनका लंबे समय से टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट से बाहर रहना और आईपीएल में लगातार खेलना उनके फ्रेंचाइजी लीग की तरफ झुकाव को दर्शाता है और अब उनकी राह पर ईशान किशन भी चलते नजर आ रहें हैं क्योंकि वह भी साउथ अफ्रीका दौरे से टीम मैनेजमेंट को बिना खबर किए लौट आए थे और तभी से बीसीसीआई के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है। टीम इंडिया के कोच और पूर्व खिलाड़ी राहुल द्रविड़ ने रणजी में खेलने की सलाह दी थी लेकिन वह वहां भी नजर नहीं आए लेकिन कुछ दिन पहले ही उनकी एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें वह हार्दिक के साथ अभ्यास करते नजर आ रहे थे। इन सारी चीजों  से यह लगने लगा है कि टीम दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक वह ग्रुप जो सिर्फ फ्रेंचाइजी लीग और टी-20 में खेलना चाहता है और एक वह जो इंडिया के लिए हर फॉर्मेट में खेलना चाहता है।

यहां बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या खिलाड़ियों का देश के लिए ना खेल कर फ्रेंचाइजी लीग खेलना सही है? क्या बीसीसीआई इन सारी चीजों को लेकर कोई सख्त कदम उठाएगी? हालांकि इस बारे में उसने कुछ दिन पहले संकेत ज़रूर दे दिए हैं।

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