निष्ठा चौहान
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चैम्पियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में भारतीय खिलाड़ी काली पट्टी पहने हुए नज़र आए। ये पट्टी उन्होंने मुम्बई के एक धाकड़ स्पिन गेंदबाज़ पद्माकर काशीनाथ शिवालकर के सम्मान में पहनी जिनका सोमवार को आकस्मिक निधन हो गया।
14 सितंबर 1940 में जन्मे शिवालकर बाएं हाथ के एक धाकड़ स्पिन गेंदबाज़ थे। वह 20 साल मुम्बई के लिए खेले लेकिन उन्होंने भारतीय टीम से खेलने का मौका नहीं मिल पाया। 50 की उम्र में उन्होंने क्रिकेट से रिटायरमेंट लिया। 2016 में उन्हें बीसीसीआई के सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
शिवालकर का निधन भारतीय क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ा सदमा है। भारत के महान क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक शिवालकर का नाम क्रिकेट की दुनिया में हमेशा याद किया जाएगा। भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। शिवालकर ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत 1960 के दशक में मुंबई की तरफ से की। उनकी उंगलियों की कारकदगी का हर कोई कायल था। उन्होंने कुल 124 फर्स्ट क्लास मैचों में 589 विकेट हासिल किए। उनका प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा देने के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी एक नई पहचान दिलाने में मददगार रहा।
क्रिकेट के प्रति उनके प्रेम और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा, उनकी मृत्यु के बाद, कई क्रिकेट खिलाड़ी और प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए आगे आए। उनके सम्मान में पूरी भारतीय टीम ने अपने हाथ पर काले रंग की पट्टी बांधी, जो ये दर्शाता है कि वे कितने दिग्गज खिलाङी थे।
