मैन ऑफ द टूर्नामेंट की रेस में ये खिलाड़ी हैं सबसे आगे

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वर्ल्ड कप अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। अभी तक कुछ खिलाड़ियों के लिए यह
टूर्नामेंट बहुत शानदार रहा है और वे अपनी टीमों के लिए सर्वश्रेष्ठ
साबित हुए हैं। अपनी टीमों से इतर ये खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के भी बेस्ट
खिलाड़ी बन सकते हैं। एक नजर डालते हैं ऐसे खिलाड़ियों पर-

विराट कोहली
पिछले तीन वर्ल्ड कप मुक़ाबलों में विराट 500 रनों का आंकड़ा नहीं पार कर
पाए थे लेकिन इस बार विराट ने रनों का अंबार लगा दिया है। पहले उन्होंने
सचिन के एक वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा 673 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ा और
फिर सबसे ज्यादा 49 सेंचुरी के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। इस वर्ल्ड
कप में कोहली ने 10 मैचों में 711 रन बनाए हैं जिसमें तीन सेंचुरी और
पांच हाफसेंचुरी शामिल हैं। भारत के इस टूर्नामेंट में अजेय रहने का बड़ा
कारण कोहली का शानदार फार्म है। वह जिस लय में बल्लेबाजी कर रहे हैं उसे
देखते हुए रविवार को फाइनल में भी इस खिलाड़ी से एक मैराथन पारी की
उम्मीद रहेगी और इसी प्रदर्शन के लिए विराट इस वर्ल्ड कप के सर्वश्रेष्ठ
खिलाड़ी भी बन सकते हैं।

मोहम्मद शमी
शमी की लहराती गेंदों का सामना करना इस वर्ल्ड कप में विपक्षी बल्लेबाजों
के लिए बहुत मुश्किल साबित हुआ है। हार्दिक की इंजरी ने इस खिलाड़ी के
लिए दरवाजे खोले और फिर मिले मौकों को शमी ने जमकर भुनाया। मात्र छह
मुकाबले खेलते हुए शमी ने 23 विकेट हासिल किए हैं जिसमें उनका औसत 9.13
रहा है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में शमी ने सात विकेट चटकाए और
इस प्रदर्शन के साथ वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे तेज 50 शिकार करने वाले
गेंदबाज भी बन गए है। भारत अहमदाबाद पहुंच चुका है और शमी भी तैयार होंगे
एक बार फिर से सामने वाली टीम पर कहर बनकर टूटने के लिए।

रचिन रवींद्र
रचिन रवींद्र इस वर्ल्ड कप की नई सनसनी साबित हुए है। केन विलियम्सन की
जगह टीम में आए रवींद्र ने न्यूज़ीलैंड के लिए इस वर्ल्ड कप में सबसे
ज्यादा रन बनाए हैं। बेशक, न्यूज़ीलैंड फाइनल में नहीं पहुंच पाया लेकिन
इस युवा खिलाड़ी ने अपनी काबिलियत से खूब वाहवाही बटोरी। अपना पहला ही
वर्ल्ड कप खेल रहे रचिन ने तीन सेंचुरी जड़कर न्यूज़ीलैंड को सेमीफाइनल
तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई।

एडम ज़ैम्पा
इस ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर के लिए टूर्नामेंट की शुरुआत खराब रहीं थी। पहले
दो मैचों में सिर्फ एक विकेट लेने के बाद, ज़ैम्पा ने वापसी की और 10
पारियों में कुल 22 विकेट हासिल किए। खराब शुरुआत के बाद कंगारू टीम की
वापसी में ज़ैम्पा का अहम रोल रहा है।

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