लोहा गर्म है, मार दो हथौड़ा, न्यूज़ीलैंड की इन सात कमज़ोरियों का फायदा उठा सकती है टीम इंडिया

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कहते हैं कि जब लोहा गर्म हो तो उस पर हथौड़ा मार देना चाहिए। यानी हथौड़ा मारने का समय आ गया है। मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में न्यूज़ीलैंड जिन समस्याओं से जूझ रहा है, उसका टीम इंडिया ज़रूर फायदा उठाएगी।

मैट हैनरी का उपलब्ध न होना टीम इंडिया के लिए वरदान है। पिछले वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में टीम इंडिया ट्रेंट बोल्ट के सामने तैयारी करती रही लेकिन हैनरी ने शुरुआती ओवरों में दो बड़े झटके देकर टीम इंडिया को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया था। दूसरे, टीम साउदी इंजरी से ज़रूर उबर चुके हैं लेकिन अभी तक वह लय पाने में सफल नहीं हो पाए हैं। इसीलिए वह अभी तक काफी महंगे साबित हुए हैं। ट्रेंट बोल्ट ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ ज़रूर शानदार गेंदबाज़ी की लेकिन बाकी मैचों में वह भी अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म से कोसों दूर दिखाई दिए हैं। डेवन कॉन्वे का खूब नाम सुना था लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी साफ झलक रही है। यही वजह है कि वह इंग्लैंड के खिलाफ 152 रन की पारी के अलावा एक भी हाफ सेंचुरी नहीं बना पाए हैं। टॉम लॉथम उल्टे सीधे शॉट लगाकर आउट हो रहे हैं। सच तो यह है कि उनकी स्वीप और रिवर्स स्वीप की ताक़त इस वर्ल्ड कप में उनकी कमज़ोरी में बदल गई है।

बेशक टीम इंडिया में पांच ही नियमित गेंदबाज़ हैं लेकिन न्यूज़ीलैंड के पास तो चार ही गेंदबाज़ हैं। जब से रचिन रवींद्र स्थापित बल्लेबाज़ बने हैं, तब से उनकी गेंदबाज़ी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। वह ग्लेन फिलिप्स के साथ टीम के पार्ट टाइम बॉलर बनकर रह गए हैं। बाकी की रही सही कसर टीम के लगातार चार मैचों में हारने से पूरी हो गई है। इसे न्यूज़ीलैंड की बदकिस्मती ही कहा जाएगा कि यह टीम 400 का आंकड़ा पार करती है तो हारती है और 383 रनों का विशाल स्कोर बनाती है तो भी हारती है।

ज़ाहिर है कि टीम इंडिया को न्यूज़ीलैंड की इन सब कमज़ोरियों का फायदा उठाना चाहिए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि अगर टीम इंडिया की पहले बल्लेबाज़ी नहीं आई तो क्या होगा। मुम्बई में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टीम का औसत स्कोर 357 रन है। बाद में बल्लेबाज़ी करती हुई टीम यहां जूझती हुई दिखाई दी है। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए चार में तीन बार टीमें जीती हैं। इसी मैदान पर श्रीलंका की टीम 55 रनों पर ढेर हो गई थी। यहां ऑस्ट्रेलिया ने भी अफगानिस्तान के खिलाफ एक समय 91 रन में सात विकेट खो दिए थे। वह तो भला हो ग्लेन मैक्सवेल का, जिन्होंने छठे नम्बर पर बल्लेबाज़ी करते हुए डबल सेंचुरी बनाने का कमाल कर दिखाया।

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ रचिन रवींद्र और केन विलियम्सन पर अगर काबू पा लिया और कॉन्वे अपने चिर परिचित अंदाज़ में अगर विकेट खो देते हैं तो डेरेल मिचेल पर भी दबाव आ जाएगा और वह गगनचुम्बी छक्कों वाली वह पारी उनकी पहुंच से बाहर हो जाएगी जो उन्होंने पिछले दिनों टीम इंडिया के खिलाफ खेली थी और कुलदीप यादव को दूसरे स्पैल में डिफेंसिव बॉलिंग के लिए मजबूर कर दिया था।

 

 

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