शमी ने किया बल्लेबाज़ों को ग़लती करने के लिए मजबूर, गुडलेंग्थ पर करते रहे गेंदबाज़ी

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जब कोई गेंदबाज़ टीम का नियमित सदस्य नहीं होता तो उसकी चुनौतियां बढ़ जाती हैं लेकिन यदि वह मौका मिलते ही अच्छी लाइन-लेंग्थ से गेंदबाज़ी करके असरदार साबित होता है तो उसके मायने कुछ ज़्यादा होते हैं। ऐसा इन दिनों मोहम्मद शमी के साथ हुआ। टीम इंडिया बेंच स्ट्रैंथ को आजमा रही है। मोहम्मद सीराज को आराम दिया गया है। शमी ने मौका मिलते ही अपनी उपयोगिता दिखा दी और शानदार पंजा लगाकर शानदार प्रदर्शन किया।

एशिया कप में शमी को नेपाल और बांग्लादेश के खिलाफ खेलने का मौका मिल पाया और यहां भी उन्होंने कुल तीन विकेट हासिल किए। इस बार उन्होंने मिचेल मार्श और स्टीव स्मिथ के रूप में शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों के विकेट चटकाए और दूसरे स्लॉग ओवरों में उन्होंने स्टायनिस, मैथ्यू शॉर्ट और शॉन एबट के विकेट चटकाए। शुरू में उन्हें कुछ स्विंग मिला, उसका उन्होंने फायदा उठाया। फिर सीम से उन्होंने चुतराईपूर्ण गेंदबाज़ी से बल्लेबाज़ों को क्रीज़ पर टिकना ही मुश्किल कर दिया और फिर अपनी कटर गेंदों से उन्होंने टेल को निपटा दिया।

शमी ने यह प्रदर्शन ऐसे समय में किया है जबकि उन्हें मोहाली की पिच से खास मदद नहीं मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने अपने अटैक को गुड लेंग्थ पर सीमित किया और विविधतापूर्ण गेंदबाज़ी से अपने सामने किसी को टिकने नहीं दिया। मिचेल मार्श के लिए जब उन्होंने एक स्लिप हटाई तो बल्लेबाज़ निश्चिंत हो गए थे कि अब गेंद ऑफ के बाहर नहीं आएगी लेकिन उन्होंने अगली गेंद पर मार्श को फॉरवर्ड डिफेंसिव शॉट के लिए मजबूर कर दिया और गेंद बल्ले का किनारा लेती हुई स्लिप में गिल के हाथों में गई। स्मिथ को उन्होंने ड्राइव की गेंद पर आउट किया जबकि स्टायनिस उनकी मिडिल स्टम्प की गेंद को जल्दी खेल गए। मैथ्यू शॉर्ट को उन्होंने कटर पर उलझाया और शॉन एबट को धीमी गेंद पर आउट किया। हालांकि शमी अन्य तेज़ गेंदबाज़ों की तुलना में धीमी गेंदें कम करते हैं क्योंकि उनकी ऐसी गेंदें आम तौर पर बल्ले पर आती हैं।

अब दिक्कत यह है कि आठवें नम्बर पर ऑलराउंडर रखकर बल्लेबाज़ी को मज़बूत बनाने की कोशिश की जा रही है जिससे शमी को अक्सर प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठाना टीम की मजबूरी हो गई है। उन्हें बुमराह या सीराज में से एक की जगह ही टीम में जगह मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर हार्दिक पांड्या की गेंदबाज़ी में भी निखार आया है, जो अच्छी बल्लेबाज़ी भी कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में शमी वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत टीम में बैलेंस लाने का काम कर सकते हैं लेकिन उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार गेंदबाज़ी करके यह ज़रूर दिखा दिया है कि उनकी गेंदबाज़ी की धार अभी हल्की नहीं पड़ी।

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