सीमित ओवर क्रिकेट में लोअर आर्डर बना टीम इंडिया के लिए बड़ी मुसीबत, इसी वजह से हारा भारत पहले दो मैच

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~दीपक अग्रहरी

वेस्टइंडीज के खिलाफ़ चल रही टी-20 सीरीज के पहले दो मैचों में जिस पोजीशन से भारत मैच हार गया, उसने जरुर भारतीय क्रिकेट के जानकारों के कान खड़े कर दिए होंगे। लोअर आर्डर से अगर रन बनते तो भारत बेशक वह मैच जीत जाता। भारत के पास ऐसे गेंदबाज नहीं हैं जो बल्ले से भी योगदान दे सकें। मुकेश कुमार, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, उमरान मलिक, जयदेव उनादकट और मोहम्मद सीराज गेंदबाजों की यह सूची लंबी होती जा रही है।
इतना ही नहीं, इस समय जो भी बॉलर भारत के लिए खेल रहे हैं और घरेलू स्तर में जिन गेंदबाजी प्रतिभाओं ने प्रभावित किया है। ज्य़ादातर सभी में एक बात सामान्य हैं कि ये बल्लेबाजी में उतनी काबिलियत नहीं रखते हैं जितना कि टी-20 और वनडे के आज के दौर में आवश्यकता है। कुछ गेंदबाजों के बल्लेबाजी आकड़ों का उदाहरण ले, खासकर जो वर्ल्ड कप की टीम में दिखने वाले हैं तो वास्तविकता काफी डराने वाली है। युजुवेंद्र चहल का वनडे की 14 पारियों में उनका सर्वाधिक स्कोर 18 का रहा है। आइपीएल में 20 पारियों में चहल ने एक भी बार गेंद को बांउड्री तक नहीं पहुंचाया है। कुलदीप यादव ने जरुर बल्लेबाजी में अपने स्पिन जोड़ीदार से बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन अंतिम-11 में शामिल होने पर उन्हें बल्ले से ज्यादा योगदान देना होगा। अन्य बॉलरों के बैंटिग में नंबर्स की तस्वीर और भी खराब है।  

पुछल्ले बल्लेबाजों में गेंद को सीमा पार पहुंचाने का दम होना चाहिए। यही हुनर भारतीय निचले क्रम में नदारद है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शामी ने टेस्ट क्रिकेट में बेशक अपनी बल्लेबाजी से कई बार टीम के लिए उपयोगी रन बनाए हैं लेकिन क्रिकेट के छोटे फार्मेटों में नीचे आकर इन दोनों खिलाड़ियों ने अभी तक कोई ऐसी पारी नहीं खेली है जिससे भारत के लोअल ऑर्डर की इस समस्या का कोई विकल्प निकला हो। भारतीय टीम अक्टूबर से क्रिकेट के महासंग्राम में उतरने वाली है और अगले साल जून में उसे टी-20 वर्ल्ड कप में भी शिरकत करने वाली है। इन दोनों मार्की टूर्नामेंटों में भारत अपने बेस्ट कॉम्बिनेशन के साथ उतरना चाहेगा लेकिन टॉप आर्डर द्वारा गेंदबाजी विभाग में मदद न मिल पाने से भारतीय टीम के लिए बल्लेबाजी और दबाजी का संतुलन तलाशना बहुत मुश्किल हो गया है। मिडिल ओवरों मे खासकर 11 से 40 ओवरों के बीच जब खेल अमूमन धीमा हो जाता है तो वहां मुख्य बॉलरों के अलावा, पार्ट टाइमर भी गेंद से महत्तवपूर्ण साबित होते हैं। इन्हीं पार्ट टाइमर बॉलरों की इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमों में भरमार है जो बल्लेबाजी में गहराई लाते है और इसी के चलते ये टीमें ज्यादा संतुलित भी दिख रही हैं।

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