क्या बुनियादी फर्क है बुमराह और एंडरसन की गेंदबाज़ी में ?

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आशीष मिश्रा

भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही सीरीज़ का सबसे बड़ा आकर्षण जेम्स एंडरसन और जसप्रीत बुमराह की गेंदबाज़ी है। ऐसा भारत में होने वाले मैचों में कम ही देखने को मिलता है, जब तेज़ गेंदबाज़ों का दबदबा देखा गया हो।

दरअसल, इन दोनों गेंदबाजों का विकेट लेने का अपना सेटअप होता है। एंडरसन में एक ही कॉरिडोर में गेंद डालने की क्षमता है, जहां वह लगातार गेंद करते हैं और फिर अचानक से फ़ुलर गेंद डालते हैं, जिसमें बल्लेबाज बल्ला चलाने के लालच में फंस जाता है। दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल का विकेट यही दिखाता है। जहां उन्‍होंने ऑफ़ स्‍टंप के क़रीब फ़ुलर गेंद डाली और गेंद यशस्वी के बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई स्लिप फील्डर के हाथ में गई। उनकी दूसरी ताक़त है लेंग्थ गेंद की लाइन में हल्‍का सा बदलाव, यानी ऑफ़ स्टंप और मिडिल स्टंप के बीच में, जहां वह गेंद को बाहर की ओर सीम कराने की क्षमता रखते हैं। रोहित शर्मा का दूसरी पारी में विकेट यही दर्शाता है कि कैसे उन्होंने डिफेंस में रोहित को छकाते हुए उन्हें बोल्ड कर दिया। वह इस दौरान लगातार रोहित को ऑफ स्टम्प के क़रीब लेंग्थ बॉल कर रहे थे लेकिन गेंद की लाइन को अंदर रखते ही उनको विकेट मिल गया।

बुमराह की भी लगभग यही ताकत है, लेकिन उनका एक्शन उन्हें अधिक असरदार बनाता था। वह भी ऑफ स्‍टंप के क़रीब की लेंग्थ गेंद को अंदर और बाहर दोनों ओर सीम कराने की क्षमता रखते हैं, लेकिन उनकी अंदर आती गेंद तेजी
से कांटा बदलती हैं और बल्लेबाज गच्‍चा खा जाता है। बुमराह गति में भी एंडरसन से तेज हैं जिसका उन्हें बहुत फायदा मिलता है। मैच का आखिरी विकेट हार्टली का हो या पहली पारी में बेन स्टोक्स को क्लीन बोल्ड करना, दोनों ही इस काबिलियत को दर्शाता है। उनका असली तुरुप का इक्‍का हैं उनकी यॉर्कर गेंद जो उन्हें खतरनाक बनाती है। पहली पारी में ओली पोप के तौर पर विकेट मिला और यह विकेट पूरी दुनिया में छा गया।

अगर दोनों में अंतर देखें तो एंडरसन को शॉर्ट गेंद बहुत पसंद है लेकिन बुमराह शॉर्ट गेंद का इतना इस्तेमाल नहीं करते। विशाखापट्टनम में देखा गया कि एंडरसन ने जहां कुल छह गेंद शॉर्ट की तो बुमराह ने पूरे मैच में दूरी बनाकर रखी और एक भी गेंद शार्ट नहीं की। इस समय बुमराह तीनों ही फॉर्मेट में दुनिया के नंबर एक गेंदबाज हैं। वह भारत में खेलें या विदेश में हर जगह वह अपनी गेंदबाजी से टीम को विकेट दिलाने में सफल रहते हैं। एंडरसन एक दिग्गज खिलाड़ी हैं। उन्होंने लंबे समय से इंग्लैंड के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। वह 41 की उम्र में भी अपनी कला से कमाल दिखा रहे
हैं। दोनों गेंदबाज अपनी टीम के प्रमुख हथियार साबित होते हैं। बुमराह अभी यंग है और उन्हें अभी लंबी क्रिकेट खेलनी है वहीं एंडरसन अपनी रिटायरमेंट लेने के करीब हैं।

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