सेना देशों में लगातार पांचवीं हार से टीम इंडिया पर उठे कई सवाल

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राहुल द्रविड़ ने नवम्बर 2021 में बतौर कोच टीम इंडिया की कमान सम्भाली थी। तब से लेकर अब तक बेशक टीम इंडिया ने कई बाइलेटरल सीरीज़ जीती हों, वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई हो लेकिन सेना देशों में उसका प्रदर्शन काफी खराब रहा है। आलम यह है कि टीम पिछले छह में से पांच मैच इन देशों में हार चुकी है।

यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि जिस टीम की बल्लेबाज़ी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ी कहा जाता रहा है, उसी बल्लेबाज़ी ने टीम को डुबोने का काम इन पांच में से चार मौकों पर किया है। पिछले दिनों सेंचुरियन का मैच तो बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों ने मिलकर डुबोया।

दो साल पहले सेंचुरियन में केएल राहुल की सेंचुरी और मोहम्मद शमी की शानदार गेंदबाज़ी के दम पर भारत ने बाजी मारी थी मगर उसके बाद हम जोहानिसबर्ग और केपटाउन के अगले दोनों टेस्ट हारकर सीरीज़ गंवा बैठे। पहले मौके पर भारतीय बल्लेबाज़ों से पौने तीन सौ रन नहीं बने जबकि दूसरे मौके पर 250 रन तक टीम इंडिया नहीं पहुंच पाई। केपटाउन में पहली पारी में विराट अकेले पड़ गए जबकि दूसरी पारी में ऋषभ पंत अकेले पड़ गए। जोहानिसबर्ग में शार्दुल ठाकुर ने पहली पारी में सात विकेट चटकाकर ज़रूर चौंकाया लेकिन बाकी खिलाड़ियों का टीम को वैसा साथ नहीं मिला, जो मैच जीतने के लिए ज़रूरी होता है।

एजबेस्टन टेस्ट में बल्लेबाज़ों ने अपनी ओर से अच्छा काम किया जबकि गेंदबाज़ों की वजह से टीम इंडिया हारी। यह वह टेस्ट था, जो भारत के 2-1 की बढ़त के बाद काफी अरसे बाद हुआ था। इसी टेस्ट में भारत को पहली पारी में 131 रनों की अच्छी खासी बढ़त हासिल हुई थी लेकिन दूसरी पारी में इंग्लैंड ने जो रूट और जॉनी बेयरस्टो की ताबड़तोड़ सेंचुरी के दम पर 378 का लक्ष्य केवल तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस मैच में सिराज और शार्दुल ठाकुर काफी महंगे साबित हुए।

पिछली वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल ओवल के मैदान पर खेला गया, जहां भारतीय बल्लेबाज़ दोनों पारियों में 300 रन भी नहीं बना पाए। हालांकि गेंदबाज़ों ने इस मैच में 18 विकेट चटकाकर अपनी ओर से शानदार प्रदर्शन किया। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इन पांचों मैचों में टीम इंडिया ने चार तेज़ गेंदबाज़ उतारे। शार्दुल अकेले तेज़ गेंदबाज़ हैं तो इन सभी मुक़ाबलों में उतरे। कुल मिलाकर बुमराह, शमी, सिराज, शार्दुल, प्रसिद्ध कृष्णा और उमेश यादव के रूप में भारत ने इन मैचों में कुल छह तेज़ गेंदबाज़ों को उतारा। इनमें पहले तीन गेंदबाज़ों को छोड़कर बाकी गेंदबाज़ों ने निराश किया। शार्दुल और प्रसिद्ध कृष्णा ने तो सेंचुरियन में पिछले दिनों पांच रन प्रति ओवर की गति से 194 रन लुटा दिए।

 

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