बुमराह, शमी और रोहित ने जगाई एक और सीरीज़ जीतने की उम्मीद

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– RajKumar Sharma

इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में टीम इंडिया से जिस ऑलराउंड प्रदर्शन की उम्मीद की गई थी बिल्कुल उसी तरह का प्रदर्शन खिलाड़ियों ने मैदान पर करके दिखाया। चाहे गेंदबाजी हो या फिर बल्लेबाजी, टीम इंडिया का इंग्लैंड दबदबा देखा गया। इसी इंग्लैंड की टीम को उसकी बल्लेबाज़ी की गहराई की वजह से मैच से पहले मजबूत समझा जा रहा था। इसी बात के मद्देनज़र भारतीय खेमे में चिंता जताई जा रही थी लेकिन मैच में सब कुछ इसके विपरीत हुआ।

रोहित शर्मा ने महत्वपूर्ण टॉस जीतकर भारत की राह आसान कर दी क्योंकि वह फील्डिंग चुने जाने के समय आदर्श बॉलिंग कंडीशंस थी। उस समय गेंद स्विंग फायदा उठाया और मैच के शुरुआती ओवरों में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी दिखाई दिया। यही वजह थी कि इंग्लैंड की टीम पहले मैच में पूरी तरह बैकफुट पर नज़र आई और उसके टॉप छह में से चार बल्लेबाज़ों को शून्य पर हीपवेलियन लौटना पड़ा।

भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों के इस मैच में दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंग्लैंड के सभी दस विकेट भारत के तेज गेंदबाजों ने ही चटकाए और मेरे ख्याल से भारतीय टीम का इससे काफी आत्मविश्वास भी बढ़ेगा क्योंकि हमेशा से ही भारत में केवल बल्लेबाजों की ही बात होती आई है बल्कि गेंदबाजों का भी आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। खासतौर पर बुमराह जिस तरह समझबूझ के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं और पिच  कंडीशन  को पढ़ रहे हैं। वहीं मोहम्मद शमी अपनी सटीक बाउंसर्स के साथ बल्लेबाजों को हक्का बक्का करने का दमखम रखते हैं।

इनके अलावा बल्लेबाजी में भारत के पास रोहित शर्मा और शिखर धवन जैसे दो अच्छे तालमेल वाले बल्लेबाज मौजूद हैं। रोहित शर्मा की खैर जितनी तारीफ करें कम है। उनके जैसे पुल और हुक शॉट आज दुनिया में कोई बल्लेबाज़ नहीं खेलता। वहीं शिखर धवन ने पहले मैच में बल्लेबाजी से न केवल खुद का आत्मविश्वास बढ़ाया बल्कि युवा बल्लेबाजों को भी काफी कुछ सीखने का मौका दिया है कि किस तरह जब एक छोर से बल्लेबाज लगातार रन बना रहा हो तो उसकासाथ कैसे दिया जाता है। वैसे भी धवन काफी लंबे समय बाद टीम इंडिया में वापसी कर रहे थे। उनको इस तरह की पारी की जरूरत भी थी और अब उम्मीद भी यही है कि धवन और पूरी टीम इंडिया इसी तरह के प्रदर्शन को आगे मैचों में भी जारी रखे क्योंकि आने वाले समय में देखें टी20 विश्व कप और अगले साल वनडे विश्व कप भी होना है। इस लिहाज़ से टीम इंडिया को लगातार इसी तरह केप्रदर्शन की जरूरत भी है।

(लेखक द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता हैं और विराट कोहली के कोच रह चुके हैं)

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